Call Us: 9956983333, Whatsapp: 9956983333
Shadow

महत्वपूर्ण

मूर्ति पूजा का रहस्य(Murti Pooja Ka Rahasya)

मूर्ति पूजा का रहस्य(Murti Pooja Ka Rahasya)

महत्वपूर्ण
मूर्ति पूजा का रहस्य(Murti Pooja Ka Rahasya) मूर्ति पूजा हमेशा से एक चर्चा का विषय रहा है | कई शताब्दियों से मूर्ति पूजा हमें करनी चाहिए या नहीं, इस पर सभी के अलग-अलग मत रहे हैं | कोई कहता है कि मूर्ति तो पत्थर की होती है | और पत्थर को पूजने से क्या फायदा | ईश्वर को मन से याद करना चाहिए | तो कुछ लोग कहते हैं कि ईश्वर को मन से याद करना तो ठीक है लेकिन फिर पूजा-पाठ कैसे करेंगे | अगर मूर्ति पूजा करने से कोई फायदा नहीं होता तो फिर इतने सारे मंदिर क्यों बनाये गए हैं | किसी का भी मत कुछ भी रहा हो , पर प्रश्न ये है कि क्या वाकई में मूर्ती पूजा करनी चाहिए या नहीं | तो इस प्रश्न का उत्तर है कि हाँ आज के समय में मूर्ती पूजा जरुर करनी चाहिए | यहाँ पर मैंने आज के समय में क्यों कहा , इसे हम आगे जानेंगे | अगर कुछ लोगों को छोड़ दें तो अब लगभग सब लोग किसी न किसी रूप में भगवान की मूर्ति को पूजते हैं |
Ganesh Ji Ke Vahan Mushak Ka Rahasya (गणेशजी के वाहन मूषक का रहस्य)

Ganesh Ji Ke Vahan Mushak Ka Rahasya (गणेशजी के वाहन मूषक का रहस्य)

महत्वपूर्ण
Ganesh Ji Ke Vahan Mushak Ka Rahasya (गणेशजी के वाहन मूषक का रहस्य) Ganesh Ji Ke Vahan Mushak Ka Rahasya (गणेशजी के वाहन मूषक का रहस्य)- एक बार अमरावती में देवताओं की सभा हो रही थी | देवराज इन्द्र राज सिंहासन पर विराजमान थे | उस सभा में गन्धर्व राज क्रौच भी उपस्थित थे | किसी आवश्यक कार्यवश उन्हें सभा से जाना पड़ा | शीघ्रता के कारण गलती से उनका पाँव वहां बैठे महर्षि वामदेव से छू गया | वामदेव ने इसे अपना अपमान समझा और क्रोधवश तुरन्त शाप दे दिया कि हे मूर्ख गन्धर्व तू इतना मदमस्त हो रहा है कि तूने शांत बैठे मुनि को लात मार दी | तू मूषक बन जा | श्राप सुनकर गन्धर्वराज भयभीत हुआ तथा मुनि के सामने रोने और गिडगिडाने लगा | महर्षि वामदेव को उसपर दया आ गयी और उन्होंने कहा कि तू मूषक तो अवश्य बनेगा किन्तु गणेशजी का वाहन(vahan) बनने के कारण तू दुखी नही रहेगा | गन्धर्वराज शीघ्र ही मूषक बनकर महर्षि
हमारी ऊर्जा

हमारी ऊर्जा

महत्वपूर्ण, हमारी ऊर्जा
ऊर्जा जीवन का केंद्र बिंदु है | इस संसार में हर एक वस्तु ऊर्जा से ही संचालित होती है | यदि ऊर्जा नहीं होगी तो ये संसार ही समाप्त हो जायेगा |  ऊर्जा दो प्रकार की होती है |- सकारात्मक ऊर्जा यानि पॉजिटिव इनर्जी या विश्व शक्ति  और नकारात्मक ऊर्जा यानि नेगेटिव इनर्जी | सकारात्मक ऊर्जा से हम संचालित होते हैं और नकारात्मक ऊर्जा हमारा पतन कर देती है | आध्यात्म के सन्दर्भ में बात करें तो आदिशक्ति, माँ दुर्गा ऊर्जा का ही स्वरुप हैं | आदिशक्ति से ही इस संसार का प्रारंभ हुआ |  इस संसार में हर एक प्राणी में अलग-अलग ऊर्जा की मात्रा है | जिससे वो संचालित होता है | जब हमारी ऊर्जा का स्तर कम हो जाता है तो हम थक जाते हैं फिर जब हम सोते हैं | तो फिर से ऊर्जा स्तर बढ़ जाता है | हम फिर से ऊर्जावान महसूस करने लगते हैं अपने को | हम फिर से चार्ज हो जाते हैं | हमारे साथ जो भी घटित हो रहा है वो हमारे अन्दर की ऊर
हमारे ग्रह

हमारे ग्रह

महत्वपूर्ण, हमारे ग्रह
वैसे तो बहुत सारे ग्रह हमारे सौर मंडल में हैं ,परन्तु नौ ग्रह ऐसे हैं जिनका प्रभाव हमारे ऊपर सबसे ज्यादा पड़ता है | वो ग्रह हैं -- सूर्य , चन्द्र , शनि , शुक्र , मंगल , गुरु , बुध , राहु , केतु | हमारा जीवन इन्ही नौ ग्रहों से संचालित होता है | हर ग्रह से जीवन के अलग-अलग पहलुओं का विचार किया जाता है | हर ग्रह हमारे जीवन के अलग-अलग कर्मों को संचालित करता है | आईये जाने किस ग्रह से क्या विचार किया जाता है | सूर्य :- सूर्य से पिता सुख विचार किया जाता है | चन्द्र :- चन्द्र से माता सुख विचार किया जाता है | मंगल :- मंगल से भाई का विचार किया जाता है | बुध :- बुध से मामा का विचार किया जाता है | गुरु :- गुरु से पुत्र का विचार किया जाता है | शुक्र :- शुक्र से स्त्री का विचार किया जाता है | शनि :- शनि से मृत्यु का विचार किया जाता है | राहु और केतु :- ये दोनों छाया ग्रह हैं और अ