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रुद्राक्ष

रुद्राक्ष से करें वास्तुदोषों का निवारण

रुद्राक्ष से करें वास्तुदोषों का निवारण

रुद्राक्ष
रुद्राक्ष वृक्ष से धनात्मक ऊर्जा की उत्पत्ति होती है | यह ऊर्जा आस-पास के स्थान को शुभ एवं अनुकूल बनाने में सहायक होती है | मान्यतानुसार रुद्राक्ष वृक्ष सभी प्रकार के नकारात्मक वातावरण को शुद्ध करने में सक्षम होता है | जिस स्थान पर रुद्राक्ष वृक्ष होता है वहां खराब दृष्टि व अशुभता व्याप्त नही रहती है अतः वास्तुदोषों से उत्पन्न नकारात्मक ऊर्जा को संतुलित करने के लिए रुद्राक्ष वृक्ष का रोपण उपयुक्त रहता है | रुद्राक्ष वृक्ष से एक विशिष्ट ऊर्जा शक्ति निरंतर रूप से उत्पन्न होती रहती है जो कि त्रिदोषों को नष्ट करने में सहायक होती है | स्थान विशेष पर व्याप्त ऊपरी बाधा एवं खराब दृष्टियों को दूर करने में रुद्राक्ष वृक्ष से उत्पन्न दिव्य ऊर्जा प्रभावी होती है | रुद्राक्ष वृक्ष से उत्पन्न दिव्य ऊर्जा स्थान विशेष की विद्युत तरंगों के असंतुलन को दूर करने में सहायक होती हैं| बारह मुखी रुद्राक्ष के द
मोक्ष प्रदायक रुद्राक्ष

मोक्ष प्रदायक रुद्राक्ष

रुद्राक्ष
आध्यात्मिक जगत में रुद्राक्ष की महिमा अपार है | यह फल अनेकानेक चमत्कारिक प्रभावों से युक्त है | इसके धारण करने वाले व्यक्ति को शिव आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है | रुद्राक्ष की उपयोगिता जितनी आध्यात्मिक जगत में है,उतनी ही लौकिक जीवन में भी है | रुद्राक्ष धारण करने से मनुष्य का मन ,चित्त ,बुद्धि और ह्रदय नियंत्रित और पवित्र बनता है | उसके पाप नष्ट होते हैं | जो व्यक्ति रुद्राक्ष धारण कर रुद्राक्ष माला से इष्ट देव का जप करता है उसे बहुत पुण्य प्राप्त होता है | रुद्राक्ष माला से नियमानुसार जप करने से अशांत मन को शांति प्राप्त होती है | रुद्राक्ष को 9,18 ,27, 36, 54 अथवा 108 दानों की संख्या में स्वर्ण अथवा चांदी के तार में अथवा लाल धागे में पिरोकर शोधित तथा निर्धारित मन्त्रों से अभिमंत्रित कर किसी शुभ एवं अनुकूल मुहूर्त में सोमवार ,अमावस्या ,पूर्णिमा अथवा ग्रहणकाल के दौरान धारण करना चाहिए | रुद्
राशि के आधार पर रुद्राक्ष धारण

राशि के आधार पर रुद्राक्ष धारण

रुद्राक्ष
मेष राशि – नामाक्षर - चू ,चे ,चो ,ला ,ली ,लू ,ले ,लो ,अ वाले व्यक्तिओं के लिए रुद्राक्ष | इस राशि के व्यक्ति तीन मुखी रुद्राक्ष को छोड़कर अन्य कोई भी रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं |मेष राशि के व्यक्ति को एक ,पांच एवं चौदह मुखी रुद्राक्ष धारण करना लाभकारी होता है | वृष राशि – नामाक्षर – ई ,ऊ ,ऐ ,वा ,वी ,वू ,वे ,वो वाले व्यक्तियों के लिए रुद्राक्ष | वृष राशि वाले व्यक्ति कोई भी मुखी रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं | विशेषतः इनके लिए चार ,छह ,तेरह मुखी रुद्राक्ष धारण करने चाहिए | मिथुन राशि – नामाक्षर – का ,की ,कू ,ध ,ड ,ध ,के ,को ,ह  वाले व्यक्तियों के लिए रुद्राक्ष | इस राशि के व्यक्ति को पांच मुखी रुद्राक्ष को छोड़कर कोई भी मुखी रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं | विशेषतः इस राशि वाले व्यक्तियों के लिए आठ मुखी रुद्राक्ष धारण योग्य होता है | कर्क राशि – नामाक्षर – ही ,हू ,हे ,हो ,डी ,डू ,डे ,डी वा
जन्मतिथि के आधार पर रुद्राक्ष धारण

जन्मतिथि के आधार पर रुद्राक्ष धारण

रुद्राक्ष
जन्मांको का महत्व जिस प्रकार प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में व्याप्त है उसी तरह भक्ति आराधना केक्षेत्र में भी इनका अपना एक विशिष्ट स्थान है | रुद्राक्ष योग ,भोग व मोक्ष के क्षेत्र में महत्वपूर्ण मने गये है | रुद्राक्षधारण के आधार बतलाये गये है ,यहाँ जन्मांको के आधार पर रुद्राक्ष धारण प्रस्तुत है | शक्ति एवं सुख –समृद्धि कीकामना हेतु भक्ति आराधना की सफलता में जन्मांकों के आधार पर रुद्राक्ष धारण कल्याणकारी हो सकता है | जन्मांक -1  वाले व्यक्तियों को एक मुखी ,तीन मुखी ,ग्यारह मुखी तथा चौदह मुखी रुद्राक्ष माला धारण लाभप्रद रहती है| यह रुद्राक्ष जातक को धन ,शासन सत्ता,अधिकार एवं भौतिक सुखों की प्राप्ति कराता है | इस जन्मांक वाले व्यक्तियों को सूर्योदय के पूर्व उठाना चाहिए तथा उगते हुए सूर्य के दर्शन करना भाग्यप्रद रहता है.समाज, राष्ट्र, संस्था इत्यादि के नेतृत्व सम्बंधित कार
रुद्राक्ष को शोधित व अभिमंत्रित कैसे करें

रुद्राक्ष को शोधित व अभिमंत्रित कैसे करें

रुद्राक्ष
आज हम आपको रुद्राक्ष को शोधित व अभिमंत्रित करना बता रहे हैं | रुद्राक्षोपनिषद के मतानुसार रुद्राक्ष के मुख में महादेव शिवजी का ,रुद्राक्ष की नाभि में भगवान विष्णु का तथा रुद्राक्ष के तल में भगवान् ब्रह्मा का वास होता है | रुद्राक्ष शोधन की विधि :- रुद्राक्ष को धारण करने से पूर्व शिधित व अभिमंत्रित कर लेना चाहिए | रुद्राक्ष को एक दिन व एक रात्रि नारियल के पानी में डालकर रखें | इसके पश्चात् रुद्राक्ष को पंचामृत से स्नान कराएं तथा गंगाजल अथवा शुद्ध जल से धो लें | धूप-दीप देकर निर्धारित मुखी के लिए निर्धारित मंत्र जप कर विधिवत रूप से धारण करना चाहिए | इस प्राकर शोधित किये गये रुद्राक्ष को पूजा स्थल पर रखकर चन्दन से टीका करें तथा जिस भी मुख का रुद्राक्ष हो उससे सम्बंधित बीज मंत्र का 108 बार जाप करते हुए रुद्राक्ष कके ऊपर निरंतर चावल फेंकते रहें | यदि संभव हो तो बीज मंत्र के जप से पूर्व बीज मं
रुद्राक्ष पहचान की असली विधि

रुद्राक्ष पहचान की असली विधि

रुद्राक्ष
नकली गौरीशंकर रुद्राक्ष , मुंह बंद किये गये रुद्राक्ष अथवा शिवलिंग , त्रिशूल और सांप आदि से युक्त नकली रुद्राक्षों की असली पहचान का तरीका निम्न है – एक कटोरे में पानी को उबालें | उबलते हुए पानी में रुद्राक्ष को एक-दो मिनट के लिए रखें तथा कटोरे को चूल्हे से उतार कर ढक दें | दो-चार मिनट के बाद ढक्कन उतार कर रुद्राक्ष का दाना निकल लें | उसे गौर से देखें यदि रुद्राक्ष में जोड़ लगाया गया होगा तो वह फट जायेगा | यदि दो रुद्राक्षों को जोडकर गौरीशंकर रुद्राक्ष बनाया गया होगा तो वह अलग-अलग हो जायेंगे | रुद्राक्ष पर यदि शिवलिंग , त्रिशूल या सांप चिपकाये गये होंगे तो वो भी अलग हट जायेंगे | जिन रुद्राक्षों में सोल्यूशन भरकर मुख बंद किया गया होगा वो बंद किये गये मुख स्पष्ट दिखाई देने लगेंगे | ऐसे में यदि रुद्राक्ष प्राकृतिक रूप से कुछ फटा हुआ होगा तो वह थोडा और फट जायेगा | यदि बेर की गुठली को रुद्राक्ष
रुद्राक्ष का परिचय

रुद्राक्ष का परिचय

रुद्राक्ष
रुद्राक्ष में ऐसी दिव्य शक्ति होती है जो मनुष्य की अज्ञात जीवन चेतना को प्रभावित कर सुख ,समृद्धि एवं शांति का मार्ग प्रशस्त करने में सक्षम है | वनस्पति जगत में रुद्राक्ष ही एकमात्र ऐसा फल है जो धर्म ,अर्थ ,काम ,मोक्ष प्रदान करने में प्रभावपूर्ण होता है | रूद्र का अर्थ है शिव और अक्ष का अर्थ है आँख.इन शब्दों के मेल से बना है रुद्राक्ष | रुद्राक्ष के ऊपर जो लकीरें बनी होती हैं उन्हें ही मुख कहा जाता है | मुख के आधार पर ही रुद्राक्ष का महत्व एवं प्रभाव आँका जाता है |जब कभी रुद्राक्ष आपस में जुड़े हुए होते हैं तो उन्हें गौरीशंकर अर्थात् शिव और पार्वती का रूप कहा जाता है | रुद्राक्ष अनेकानेक चमत्कारिक प्रभावों से युक्त है.रुद्राक्ष के भिन्न-भिन्न मुखी फल भाग्योदय ,रोग निवृत्ति ,व्यापार वृद्धि ,भूत-प्रेत बाधा नाश ,संतान एवं पुत्र प्राप्ति ,चुनाव में जय-विजय प्राप्ति ,विवाह व्यवधान में निवृत्ति ,